Friday, July 18, 2008
आ रहा हूँ में
हेलो फ्रेंड ,काफी दिनों के बाद अब में शीघ्र आपके साथ रहूगां और कई मुद्दों ,अपनी बिरादरी पर चर्चा करेंगे !
Friday, April 18, 2008
नमन गणतंत्र का आठवा अंक शीघ्र
ग्वालियर -चम्बल संभाग के पत्रकार ,अधिकारी व राजनेताओ एवं विभागों व अन्य संस्थाओ के नाम सहित मोबाइल व लैण्ड लाइन नंबरों से समाहित "नमन गणतंत्र "का आठवां अंक शीघ्र आने वाला है !अब बस इसके विमोचन का इंतजार है !नमन गणतंत्र का प्रकाशन ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली द्वारा 1999-2000 से शुरू किया गया था ! इसमे पत्रकारों के साथ पुलिस, राजनेता, संस्थाओं, सरकारी, गैर सरकारी विभाग के विस्तृत मोबाइल और लैण्ड लाइन नम्बर रहते हैं ! इसका यहाँ के पत्रकारों, अधिकारी व राजनेताओं को बहुत ही बेसब्री से इंतज़ार रहता है!
Friday, March 21, 2008
Tuesday, February 19, 2008
ग्वालियर से तीन नए अखबार
ग्वालियर में तीन नए अखबारों के शुरू होने की सुगवुगाहट है! एक अखबार तो भोपाल बेस्ड " राज एक्सप्रेस " जल्द ही ग्वालियर से शुरू होने वाला है! यूँ उसका ग्वालियर संस्करण छप ही रहा है ! दो और दैनिक अखबार रियल स्टेट में पैसा कमा चुके कुछ नव कुबेर शुरू करने वाले हैं ! जिसमे एक समाचार पत्र का नाम है "B P N TIMES" जबकि दूसरे समाचार पत्र का नाम ''आदित्य राज "बताया जा रहा है !पत्रकार जगत में खूब चर्चा है कि कौन - कौन कहाँ जा रहा है !कुछ भी हो मीडिया से जुड़े लोगो की खूब
बल्ले -बल्ले होने बाली है !
बल्ले -बल्ले होने बाली है !
Wednesday, February 13, 2008
एक पत्रकार अभी जीवित है !
पत्रकार - मीडियाकर्मी और नेताओं के बीच के रिश्ते पर एक भयानक त्रासदी है ! जब पत्रकार भ्रष्ट नेता के भ्रष्टाचार की पोल खोलता है तो ! नेता यह बात दबाने के लिए पहले पैसा फेंकता है ! धमकाता है ! नौकरी से निकलवाता है! यदि ये प्रयास सफल नही हुए तो फिर उत्तराखंड के युवा पत्रकार स्व डोभाल की तरह उसे मौत के घाट उतरवाता है ! इसके ख़िलाफ़ साथी पत्रकार पहले एकजुट होते है ! फिर विज्ञापन/ प्रलोभन का तेज झोंका आता है तो वे पीड़ित मृत पत्रकार को ब्लेकमेलर बताते हुए खबरें गढ़ते हैं!
मध्यप्रदेश के गुना में फिर ऐसी कहानी दोहराई गई ! यहाँ एक नेता के खिलाफ गड़बड़ झाला की आवाज बुलंद करने की सजा वहाँ के एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार को जानलेवा हमले के रूप में भुगतना पड़ी ! पत्रकार की इतनी पिटाई की गई की पाँव की हड्डी 18 जगह से टूट गई! डॉ. का मानना है कि यह पत्रकार कभी भी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा
दूसरे दिन घटना के विरोध में सभी पत्रकार कलेक्टर से मिले! तीसरे दिन नेता जी ने पत्रकारों को सेट किया! उसके बाद ज्यादातर अखवारों ने छापा दुनिया का सबसे ज्यादा चोर उनका यानी पत्रकारों का ही साथी था ! नेता जी जैसे संत ने तो हमारे तालाब की यही मछली को मारकर तालाब के साफ करके चोथे स्तम्भ पर उपकार ही किया है! बेचारी पुलिस कह रही है कि हमने आरोपी पकड़ लिए है ! फरियादी का क्या ? वे नेता जी का हाथ होने से मना कर रहे हैं अब हम आरोपी कि बात मानेंगे या फरियादी की ! कहो खूब रही न जब चोर कह रहा मैंने चोरी नहीं कि तो भला फरियादी कि क्या विसात कि वह चोर को पकड़वा सके ! आप कहो तो कहो में नहीं कहता कि चोर चोर मोसेरे भाई इसी को कहते हैं !
एक पत्रकार अभी जीवित है !
पत्रकार - मीडियाकर्मी और नेताओं के बीच के रिश्ते पर एक भयानक त्रासदी है ! जब पत्रकार भ्रष्ट नेता के भ्रष्टाचार की पोल खोलता है तो ! नेता यह बात दबाने के लिए पहले पैसा फेंकता है ! धमकाता है ! नौकरी से निकलवाता है! यदि ये प्रयास सफल नही हुए तो फिर उत्तराखंड के युवा पत्रकार स्व डोभाल की तरह उसे मौत के घाट उतरवाता है ! इसके ख़िलाफ़ साथी पत्रकार पहले एकजुट होते है ! फिर विज्ञापन/ प्रलोभन का तेज झोंका आता है तो वे पीड़ित मृत पत्रकार को ब्लेकमेलर बताते हुए खबरें गढ़ते हैं!
मध्यप्रदेश के गुना में फिर ऐसी कहानी दोहराई गई ! यहाँ एक नेता के खिलाफ गड़बड़ झाला की आवाज बुलंद करने की सजा वहाँ के एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार को जानलेवा हमले के रूप में भुगतना पड़ी ! पत्रकार की इतनी पिटाई की गई की पाँव की हड्डी 18 जगह से टूट गई! डॉ. का मानना है कि यह पत्रकार कभी भी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा
दूसरे दिन घटना के विरोध में सभी पत्रकार कलेक्टर से मिले! तीसरे दिन नेता जी ने पत्रकारों को सेट किया! उसके बाद ज्यादातर अखवारों ने छापा दुनिया का सबसे ज्यादा चोर उनका यानी पत्रकारों का ही साथी था ! नेता जी जैसे संत ने तो हमारे तालाब की यही मछली को मारकर तालाब के साफ करके चोथे स्तम्भ पर उपकार ही किया है! बेचारी पुलिस कह रही है कि हमने आरोपी पकड़ लिए है ! फरियादी का क्या ? वे नेता जी का हाथ होने से मना कर रहे हैं अब हम आरोपी कि बात मानेंगे या फरियादी की ! कहो खूब रही न जब चोर कह रहा मैंने चोरी नहीं कि तो भला फरियादी कि क्या विसात कि वह चोर को पकड़वा सके ! आप कहो तो कहो में नहीं कहता कि चोर चोर मोसेरे भाई इसी को कहते हैं !
Wednesday, January 30, 2008
चम्बल घाटी तक पहुँची ब्लोगिंग

ब्लोगिंग की गूँज अब "चम्बल घाटी" तक पहुँच चुकी है! ग्वालियर से प्रकाशित नई दुनिया के संपादक श्री राकेश पाठक ने चम्बल घाटी नाम से ब्लॉग पर अपनी अंगुलियों का जादू चला दिया है ! इससे पहले हम सब उनकी कलम का जादू हर रोज समाचार पत्र में पड़ते रहे हैं! उम्मीद है की ये ब्लॉग ब्लॉग पत्रकारिता में मील का पत्थर बनेगा !
हम सभी ब्लॉग पर आने के लिए उन्हें बधाई देते हैं !
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