जगत प्रसिद्व कोहिनूर हीरा ग्वालियर की महारानी ने अपने दो बच्चो की हिफाजत के बदले हुमायूँ के मार्फ़त बाबर को भेंट में दिया था !ग्वालियर के पूर्व महाराजा विक्रमादित्य सिंह पानीपत के मैदान में इब्राहीम लोदी की सेना के साथ बाबर से युद्ध करते हुए खेत रहे थे !बाद में हुमायूँ दिल्ली से होते हुए आगरा आया तब उसकी फौज ने विक्रमादित्य की पत्नी तथा दो बच्चो को बंदी बना लिया था !ग्वालियर के तोमर राजा विक्रमादित्य मान सिंह के पुत्र थे और गद्दी के वारिस थे !उन्हें मजवूरी में ग्वालियर रियासत इब्राहीम लोदी को सोपनी पड़ी थी !इब्राहीम ने विक्रमादित्य को आगरा के पास स्थित शमशाबाद की जागीर सौप कर अपना दरवारी बना लिया था !ग्वालियर इब्राहीम के पिता सिकंदर लोदी के समय से ही आखं की किरकिरी बना रहा !उसने ग्वालियर पर पाँच बार हमला किया लेकिन हर बार पराजय उसके हिस्से में आई और वह ग्वालियर किला फतह नही कर सका !सिकंदर लोदी ने दिल्ली छोड़कर आगरा को अपनी राजधानी बनाया था !हुमायूं जब शमशाबाद में विक्रमादित्य की विधवा रानी से मिला तो उन्होंने भरोसा दिलाया की इब्राहीम लोधी हमारा भी दुश्मन था !अपनी बात पर विस्वास दिलाने के लिए महारानी ने बेशकीमती कोहिनूर हीरा यह कहते हुए भेंट किया था की मेरे लिए मेरे बच्चे सबसे प्यारे है !आपने मेरी बेटी की इज्जत बचाई ,बेटे की जान बचाई और मेरी जिन्दगी मुझे लौटा दी ,यह हीरा शुक्र गुज़री के तौरपर स्वीकार करे !विक्रमादित्य का बेटा राम सिंह तोमर बाद में मेवाड़ के महारानाओ के पास चला गया था !महाराणा प्रताप ने उसे ग्वालियर के राजा के तौर पर अपने दरबार में स्थान दिया था !हल्दी घाटी के युद्ध में ग्वालियर के इसी तोमर राजा ने अपनी शहादत देकर महाराणा प्रताप की जान बचाई थी !इस युद्ध में उसके दो बेटो ने भी शहादत दी और इसी के साथ ग्वालियर के तोमर के राजपरिवार का अंत हो गया !
Wednesday, June 10, 2009
Monday, June 8, 2009
तबियत के राजा थे श्याम
मेरा श्याम राजा से ज्यादा मिलना -जुलना नही था !पिछले कई वर्षो से न उनसे रूबरू हुआ और न फोन पर बात हुई !बावजूद इसके वे आसपास ही खड़े महसूश होते थे !एक जेसी सोच और एक जेसा फक्कड़पन मेरे और राजा जी के बीच के रिश्ते का आधार था !राजाजी कलाकार भी थे और चिन्तक भी !वामपंथ राजी जी की राजनीतिक सोच का हिस्सा था !राजाजी ने अपना जीवन अपने ढंग से अपनी शर्तो पर जिया !किसी की परवाह नही की !श्याम से राजा बनने तक वे अपने ढंग के व्यक्ति थे !मूलिकता उनमे अनंत थी ,लेकिन समाज को इसका पूरा लाभ नही मिला !कला धर्म से विमुख होकर राजा व्यवसाय की और उन्मुख हुए ,तो फ़िर व्यवसाय के ही होकर रह गये !वर्षो पहले रसोई गेस बेचते -बेचते राजाजी ने हिन्दू सम्रध्वी नाम से एक सांध्य दैनिक निकालना शुरू किया !इस अखबार के प्रातःकालीन संस्करण की योजना बनी तो राजाजी ने मुझे याद किया !मै उनके प्रकाशन से कोई तीन -चार महीने ही जुदा रह सका !मेने पाया की श्याम के राजा होने के बाद बहुत कुछ बदल गया था किंतु उनका राजा मन नही बदला था !असहमती उन्हें स्वीकार नही थी और किसी मुद्दे पर वे स्यमंआसानी से सहमत नही होते थे !अखबार के घालमेल के मुद्दे पर हम दोनों में सहमती नही बनी !उन्होंने प्रत्यछ रूप से मेरा विरोध किए बिना मुझे मेरी जिम्मेदारियों से मुझे स्वतंत्र कर दिया !इसके बावजूद रिश्तो के निर्वाह में राजाजी कभी पीछे नही हटे !बाद के वर्षो में राजाजी का वामपंथ कट्टर हिन्दू वाद की भेट चढ़ गया !इस परिवर्तन के समर्थन में भी राजाजी के पास अकाट्य तर्क होते थे !मुझे लगता हे की राजा जी की रचनाधर्मिता और मोलिकता पर अगर व्यवसाय अतिक्रमण नही करता तो वे समाज को और भी कुछ ज्यादा दे सकते थे !राजा जी असमय चले गये !उनके जाने पर विस्वास करने में किंचित परेशानी तो होती है किंतु सत्य तो स्वीकार करना ही होता है !राजाजी का जाना स्राजन्शीलता ,साहित्य ,पत्रकारिता और समाज सभी की छति है क्योंकि राजाजी जेसा दूसरा हो नही सकता जो जोत से जोत जलाने की अभूतपूर्व छमता रखता हो !इति !
(ग्वालियर :वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल की कलम से )
Friday, June 5, 2009
ग्वालियर के किले पर लिखी थी बाबर ने बसीयत
------ग्वालियर के किले में प्रवास के दौरान उसने सैनिकों द्वारा जैन प्रतिमाएं खंडित किए जाने के बाद ही उसने किले में हुमायूँ के नाम बसीयत लिखी !इसमे बाबर लिखता है -
*मेरे पुत्र ,भारत में विभिन्न धर्मो के लोग रहते है !इसलिए तुम धर्म के प्रति अंध विश्वासी कभी मत होना और सभी धर्मो का समानरूप से आदर सम्मान करना !
*भारत में हिन्दूयौं का दिल जीते बिना मुग़ल सल्तनत टिक नही सकेगी !इसलिए हिन्दूयों का दिल जीतने के लिए तुम गों मॉस खाना बंद कर देना और गों हत्या पर पावंदी लगा देना !
*हिन्दूयों की भावनाओं को आहात करने तथा उन्हें भड़काने का कोई काम नही करना ,तुम मठ मन्दिर कभी मत तोड़ना !
*इस्लाम का प्रचार तखत और तलवार की ताकत से नही प्रेम और उपकार से करना !
प्रसिद्व एतिहासिक पुस्तक मीदिवल इंडियाना तथा २८ century ऑफ़ इंडिया में बाबर की इस बसीयत का
vistaar से उल्लेख है !
ग्वालियर की सुर्खियाँ
Tuesday, August 5, 2008
अग्रवाल व् मिश्रा पत्रकार कल्याण कोष समिति में शामिल
मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रांतीय महासचिव विनय अग्रवाल, संभागीय महासचिव प्रवीण मिश्रा, को राज्य पत्रकार कल्याण कोष समिति का सदस्य चुना गया है। चुने गए पदाधिकारिओं का कार्यकाल दो साल होगा । पत्रकारद्वय को श्रमजीवी पत्रकार संघ ने बधाई दी । बधाई देने वालों में डॉ सुरेश सम्राट, सुरेश शर्मा, प्रदीप मन्दरे, रविन्द्र झारखरिया, रविशेखर, अरविन्द श्रीवास्तव, अनिल अरोरा, उमेश सिंघ , आदि थे।
ग्वालियर विकास समिति करेगी ४३ गोरवों का सम्मान
इस वर्ष १५ अगस्त को ३१ वे अभिनन्दन समारोह में महानगर की सामाजिक संस्था ग्वालियर विकास समिति ४३ गोरवों का सम्मान करने का निर्णय गत रात्रि जीवाजी विस्वविध्यालय के कुलपति आचार्य Ak Kapoor एवं LNIPE के कुलपति मेजर जनरल SN Mukherjee की सयुंक्त अध्यक्षता में संपन्न चयन समिति की बैठक में लिया गया । बैठक में DIG आदर्श कटियार, DIG BSF V.K Pandey, additional SP Manohar Verma, Anil Kuswah, ADM R.K Jain, Aditional Collector Vinod Sharma, Dean Dr. Sheela Sapre, वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक, सुरेश सम्राट, केन्द्र निदेशक दूरदर्शन आर बी भंडारकर , जनसंपर्क संचालक सुभाष अरोरा, मेला उपाध्यक्ष वेद प्रकाश, डॉ आभारानी टमोतिया , अखिलेंदु अरजरिया, अरुणा सैन्य, नलिनी श्रीवास्तव, डॉ ऍम ऍम श्रीवास्तव, आदि ने सर्वसम्मति से तिघरा में पानी लेन हेतु भागीरथी प्रयास के लिए जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा सहित ४२ अन्य गोरवों को सम्मानित करने का निर्णय लिया। ग्वासिस के महासचिव मनमोहन घायल ने बताया बताया की शहर के चुनिन्दा लोगो को जिन्होंने शहर के विकास में बहुत योगदान दिया है । उन सभी लोगों को सम्मानित किया जाएगा । जिनमे मुख्य रूप से नईदुनिया के पत्रकार राजदेव पाण्डेय, निर्मला अरोरा, अब्दुल हामिद कादरी, डॉ संदीप कुल्श्रेष्ट्र मोहन अम्बर, आदि को सम्मानित किया जाएगा। युवा पत्रकार राजदेव पाण्डेय को स्वर्गीय कैलाश परिहार पत्रकारिता सम्मान दिया जाएगा। कार्य क्रम में Dr. AS Bhalla, डॉ दीपेन्द्र टमोटिया , धर्म कुमार, अशोक जैन, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।